नई दिल्ली। सीएए (CAA) कानून के विरोध की आड़ में हुई हिंसा के मामले में कांग्रेस या तो कन्फ्यूज है या फिर दंगाइयों के साथ खड़ी नजर आ रही है।
ये बात इसीलिए उठ रही है क्योंकि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अगुवाई में यूपी पुलिस की शिकायत करने के लिए कांग्रेस राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास तो पहुंच गई, लेकिन आए दिन सामने आ रही देशद्रोही बयानबाजी और पीएफआई (PFI) की साजिश को लेकर कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है।
अब इसे कांग्रेस की मजबूरी कहें या सियासी चाल लेकिन कांग्रेस के इस रवैये पर सवाल उठना तो लाज़मी है। सवाल ये कि पुलिस पर दोष मढ़ने वाली कांग्रेस दंगाइयों पर खामोश क्यों है? क्या कांग्रेस घोर मुस्लिम तुष्टिकरण में जुट गई है?
CAA के विरोध की आड़ में हुई हिंसा के खिलाफ यूपी पुलिस का एक्शन कांग्रेस को खटक रहा है। पुलिस की कार्रवाई कांग्रेस के गले नहीं उतर रही। दंगाइयों पर पुलिस का एक्शन कांग्रेस को इस कदर खटक रहा है कि वो यूपी पुलिस कि शिकायत करने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास पहुंच गए।
सोमवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शरण में पहुंचा। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को 31 पन्नों के प्रतिवेदन का पुलंदा सौंपा।
साथ ही उन्होंने सबूत के तौर पर कुछ वीडियो भी सौंपे। यूपी पुलिस की शिकायत करने के लिए राहुल-प्रियंका अपने कई बड़े नेताओं की पलटन के साथ पहुंचे थे। इन नेताओं में भड़काऊ बयानबाजी के लिए मशहूर रहने वाले इमरान मसूद भी शामिल थे।
राहुल-प्रियंका ने यूपी पुलिस पर बर्बरता का दोष मढ़ते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार से पुलिस कार्रवाई की जांच कराने और पुलिस पर कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन जब मीडिया से बात करने का मौका आया तो राहुल-प्रियंका ने चुप्पी साध ली और अभिषेक मनु सिंघवी को मोर्चा थमा दिया।
कांग्रेस ने यूपी पुलिस की बर्बरता का जो राग छेड़ा है, उस पर विपक्षी पार्टियां भी कांग्रेस के सुर में सुर मिला रही हैं और बीजेपी पर पलटवार कर रही हैं।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में शिकायत करना हर नागरिक का अधिकार है। इसलिए कांग्रेस ने जो शिकायत की है सवाल उस पर खड़े नहीं हो रहे, बल्कि सवाल तो खड़े हो रहे हैं कांग्रेस की उस चुप्पी पर जो उसने देशद्रोही बयानबाजों, PFI के पाप और दंगाइयों के कारनामों पर साध रखी है।
अब इसे कांग्रेस की मजबूरी कहें या सियासी चाल लेकिन कांग्रेस के इस रवैये पर सवाल उठना तो लाजिमी है और सवाल ये कि पुलिस पर दोष मढ़ने वाली कांग्रेस दंगाइयों पर खामोश क्यों है?
सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि हिंसा के लिए पीएफआई को जो करोड़ों रुपए का फंड मिला है उसका कुछ हिस्सा कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल के खाते में भी गया है और इस मामले पर भी कांग्रेस ने अभी तक खामोशी अख्तियार कर रखी है।

0 Comments